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तनाव के बीच भारत-चीन सैन्य अफसरों में फिर वार्ता, रूस दौरे पर रक्षामंत्री

  • चीन की पेशकश पर हो रही बातचीत, मोल्डो में चल रही है बैठक
  • गलवान में हुई झड़प के बाद उत्पन्न तनाव को कम करने की कोशिश
  • छह जून के समझौते पर भी होगी बात, एलएसी पर नियम बदलने की दी जाएगी जानकारी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर तनाव कम करने को लेकर भारत-चीन की सेना के बीच एक बार फिर बातचीत हो रही है। चीन के आग्रह पर ये बैठक बुलाई गई है। कोर कमांडर स्तर की बैठक चीन की तरफ मोल्डो इलाके में हो रही है। ये बैठक गलवान में चीन के साथ हुई झड़प के बाद बने तनाव को कम करने को लेकर हो रही है। वहीं रक्षामंत्री राजनाथ सिंह तीन दिवसीय दौरे पर रूस रवाना हो गए हैं। इस दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा और रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा होगी।
भारत-चीन के बीच चल रही बैठक में भारत की ओर से लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह बैठक का नेतृत्व कर रहे हैं तो चीन की तरफ से मेजर जनरल लियु लिन बैठक में शामिल हुए। गलवान घाटी में खूनी झड़प के बाद दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच यह बड़ी बातचीत हो रही है। इसका मकसद एलएसी पर पहले की स्थिति को बनाना है। भारत की ओर से एलएसी पर पहले की स्थिति को बनाए रखने की मांग की जाएगी। साथ ही गलवान जैसी घटना भविष्य में न हो, इसके लिए भी दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों की ओर से बातचीत की जाएगी। इसके अलावा छह जून के एग्रीमेंट पर भी बात होगी, जिसमें तय हुआ था कि चीन अपनी सेना को एलएसी से पीछे ले जाएगी। वहीं भारत ने चीन से एलएसी पर दोनों देशों के जवानों के बीच झड़प को लेकर नियम बदलने को कहा है। यह फैसला गलवान घाटी में चीन के विश्वासघात के बाद लिया गया है। भारत ने चीन को एलएसी के पास बनाए गए सभी बिल्डअप को खत्म करने के लिए कहा है। भारत ने गलवान वैली में अपनी प्रतिबद्धताओं को फिर से दोहराया है। वहीं भारत-चीन तनाव के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज तीन दिन के दौरे पर रूस रवाना हो गए हैं। माना जा रहा है कि भारत एस-400 ट्रायम्फ एंटी मिसाइल सिस्टम की डिलीवरी में तेजी लाने के लिए रूस पर दबाव डाल सकता है। चीन के साथ बढ़ते तनाव पर भी बातचीत हो सकती है। रक्षामंत्री मॉस्को में 75वें विक्ट्री परेड डे में भी शामिल होंगे।

एलएसी पर माउंटेन फोर्स तैनात, चीन भी मानता है लोहा

नई दिल्ली। गलवान घाटी में भारत के 20 सैनिकों की शहादत के बाद तनाव चरम पर है। लद्दाख में भारत ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सेना को अलर्ट कर दिया है। भारत ने 3488 किलोमीटर लंबे एलएसी पर माउंटेन फोर्स को तैनात कर दिया है। ये सेना की वह टुकड़ी है जो पहाड़ की ऊंचाइयों से दुश्मनों पर नजर रखती है। माउंटेन फोर्स गुरिल्ला युद्ध और मुश्किल हालात में दुश्मनों को सबक सिखाने में माहिर हैं। इन्हें पहाड़ों पर लडऩे के लिए स्पेशल ट्रेनिंग दी जाती है। 1999 के करगिल युद्ध में माउंटेन फोर्स ने पाकिस्तानी सैनिकों को मुंहतोड़ जवाब दिया था। खुद चीन के एक्सपर्ट ने पिछले दिनों कहा था कि इतनी मजबूत माउंटेन फोर्स न तो अमेरिक के पास है और न ही रूस के पास बल्कि ये ताकत सिर्फ भारत के पास है। इस फोर्स में उत्तराखंड, लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के सैनिकों को जगह दी जाती है।

रूस की यात्रा के दौरान भारत-रूस के बीच रक्षा और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने को लेकर बातचीत होगी।
राजनाथ सिंह, रक्षामंत्री

कानपुर शेल्टर होम मामले पर भडक़े अखिलेश, कहा हो उच्चस्तरीय जांच

  • शारीरिक शोषण करने वालों के खिलाफ सरकार करे कार्रवाई

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। स्वरूप नगर स्थित राजकीय बालिका सुधार गृह की सात नाबालिग लड़कियों के प्रेग्नेंट होने के मामले पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने एक बार फिर भाजपा सरकार को घेरा है। उन्होंने इस मामले में उच्चस्तरीय जांच और दोषियों को सजा दिलाने की मांग की है।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने आज ट्वीट करके कहा, कानपुर के सरकारी बाल संरक्षण गृह से आई खबर से उप्र में आक्रोश फैल गया है। कुछ नाबालिग लड़कियों के गर्भवती होने का गंभीर खुलासा हुआ है। इनमें 57 कोरोना व एक एड्स से भी ग्रसित पाई गयी है, इनका तत्काल इलाज हो। उन्होंने कहा कि सरकार शारीरिक शोषण करनेवालों के खिलाफ तुरंत जांच बैठाए। गौरतलब है कि जांच में सात नाबालिग लड़कियां प्रेग्नेंंट मिली हैं जबकि एक एचआईवी संक्रमित दूसरी को हेपेटाइटिस सी का संक्रमण है। वहीं कई कोरोना पॉजिटिव मिली हैं। इसके चलते उन्हें विशेष निगरानी में रखा गया है। संवासिनयों के गर्भवती की पुष्टि के बाद उनका पूरा ब्यौरा खंगाला जा रहा है।

नूतन ठाकुर ने राष्टï्रीय मानवाधिकार आयोग में की शिकायत

एक्टिविस्ट डॉ. नूतन ठाकुर ने कानपुर संवासिनी केस में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के समक्ष शिकायत प्रस्तुत करते हुए प्रभावित बालिकाओं को यथोचित क्षतिपूर्ति दिए जाने तथा प्रकरण में उच्चस्तरीय जांच कराते हुए दोषी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। नूतन ने अपनी शिकायत में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान रिट याचिका संख्या 4/2020 में अपने अत्यंत विस्तृत आदेश तीन अप्रैल 2020 में कोविड काल में बाल सुरक्षा गृहों हेतु कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे। इसके बाद भी कानपुर संवासिनी गृह में उक्त आदेशों का पालन नहीं किया गया।

मनमोहन की नसीहत पर बोले नड्डा सेना के साहस पर बंद करिए सवाल

  • मनमोहन के शासन काल में 600 बार चीनी सैनिकों ने किया था भारत की सीमाओं का अतिक्रमण

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा गलवान घाटी पर दिए गए बयान का सिलसिलेवार ढंग से जवाब दिया है। उन्होंने ट्वीट किया, डॉ. मनमोहन सिंह उसी पार्टी से ताल्लुक रखते हैं कि जिसने असहाय स्थिति में 43 हजार वर्ग किमी जमीन चीन को सरेंडर कर दी थी। यूपीए के शासन के दौरान हतोत्साहित करने वाली रणनीति और सरेंडर देखे गए।
उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री रहते हुए 2010 से 2013 के बीच 600 बार चीन की तरफ से भारतीय सीमाओं का अतिक्रमण किया गया। मनमोहन सिंह चाहें तो कई विषयों पर अपनी बुद्धिमत्तापूर्ण राय रख सकते हैं लेकिन प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी कतई उनमें से एक नहीं है। मनमोहन सिंह और कांग्रेस पार्टी को हमारी सेनाओं का बार-बार अपमान बंद कर देना चाहिए। उनके साहस पर प्रश्नचिह्न नहीं खड़े करने चाहिए। ये लोग एयर स्ट्राइक और सर्जिकल स्ट्राइक के वक्त भी ऐसा कर चुके हैं। गौरतलब है कि पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने कहा था कि जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। हम सरकार से आगाह करेंगे कि भ्रामक प्रचार कभी भी कूटनीति और मजबूत नेतृत्व का विकल्प नहीं हो सकता। सरकार के निर्णय और उसके कदम तय करेंगे कि भविष्य की पीढिय़ां हमारा आंकलन कैसे करें। जो देश का नेतृत्व कर रहे हैं, उनके कंधों पर कर्तव्य का गहन दायित्व है। प्रजातंत्र में यह दायित्व प्रधानमंत्री का है।

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